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ग्रामीणों ने बताया कि सीसी सड़क निर्माण के दौरान कंक्रीट डालने से पहले आधार सतह पर पॉलीथीन शीट बिछाना आवश्यक होता है, ताकि सीमेंट का पानी जमीन में न समाए और कंक्रीट अपनी निर्धारित मजबूती प्राप्त कर सके। लेकिन निर्माण स्थल पर ऐसी कोई पॉलीथीन शीट नहीं बिछाई गई। इसके अलावा सड़क की मोटाई भी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं रखी जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण एजेंसी द्वारा लागत कम करने के उद्देश्य से गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि कंक्रीट को मजबूत एवं सघन बनाने के लिए वाइब्रेटर मशीन का उपयोग अनिवार्य माना जाता है। वाइब्रेटर के प्रयोग से कंक्रीट के भीतर मौजूद हवा के बुलबुले निकल जाते हैं और सड़क अधिक टिकाऊ बनती है। उनका आरोप है कि निर्माण के दौरान वाइब्रेटर मशीन का उपयोग नहीं किया गया, जिससे सड़क की मजबूती प्रभावित होने की आशंका है। ग्रामीणों के अनुसार अब तक लगभग 40 मीटर सड़क का निर्माण किया जा चुका है।
ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब निर्माण कार्य शुरू हुआ, उस समय संबंधित विभाग का कोई इंजीनियर या तकनीकी अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं था। बिना तकनीकी पर्यवेक्षण के निर्माण कार्य कराए जाने से गुणवत्ता सुनिश्चित नहीं हो पा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय-समय पर विभागीय अधिकारी निरीक्षण करते, तो निर्माण में संभावित अनियमितताओं को रोका जा सकता था।
ग्रामीणों ने पारदर्शिता के अभाव का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि निर्माण स्थल पर कार्य की स्वीकृत राशि, योजना का नाम, निर्माण एजेंसी, संबंधित विभाग, कार्य अवधि तथा अन्य आवश्यक जानकारियां प्रदर्शित करने वाला सूचना बोर्ड नहीं लगाया गया है। सूचना बोर्ड नहीं होने के कारण ग्रामीणों को यह तक जानकारी नहीं है कि सड़क का निर्माण किस विभाग की देखरेख में और किस एजेंसी द्वारा कराया जा रहा है। इससे निर्माण कार्य की निगरानी और जवाबदेही पर भी प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क जैसी आधारभूत सुविधा का निर्माण पूरी गुणवत्ता के साथ होना चाहिए, क्योंकि यही सड़क वर्षों तक गांव के लोगों के आवागमन का प्रमुख माध्यम बनेगी। यदि निर्माण कार्य में अभी से लापरवाही बरती गई तो भविष्य में सड़क के टूटने-फूटने की पूरी संभावना रहेगी, जिससे शासन को दोबारा मरम्मत पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा और ग्रामीणों को भी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, संबंधित विभाग तथा वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि निर्माणाधीन सीसी सड़क की स्वतंत्र एवं तकनीकी जांच कराई जाए। साथ ही सड़क की मोटाई, सामग्री की गुणवत्ता, निर्धारित मानकों के पालन तथा निर्माण प्रक्रिया की जांच कर दोषी पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार, निर्माण एजेंसी एवं जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि जांच पूरी होने तक निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर विशेष निगरानी रखी जाए, ताकि सार्वजनिक धन का सदुपयोग हो और ग्रामीणों को गुणवत्तापूर्ण सड़क मिल सके।
समाचार लिखे जाने तक इस संबंध में संबंधित विभाग अथवा निर्माण एजेंसी का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका था। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
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