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बुधवार, 1 जुलाई 2026

आकाश गुप्ता पर लगाए गए आरोपों पर तपकरा भाजयुमो मंडल के पूर्व उपाध्यक्ष सागर सिंह का पलटवार, बोले— बिना प्रमाण बदनाम करने की साजिश बर्दाश्त नहीं

जशपुर। सोशल मीडिया पर बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय (सीएम हाउस) के प्रभारी आकाश गुप्ता को लेकर प्रसारित कथित आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए तपकरा भाजयुमो मंडल के पूर्व उपाध्यक्ष सागर सिंह ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि बिना किसी ठोस प्रमाण के किसी अधिकारी या व्यक्ति की छवि खराब करने का प्रयास न केवल गैरजिम्मेदाराना है, बल्कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों के भी विपरीत है।


सागर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में बगिया स्थित सीएम हाउस क्षेत्र की जनता की समस्याओं के समाधान के लिए लगातार कार्य कर रहा है। यहां आने वाले लोगों की शिकायतों का प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत निराकरण किया जाता है। ऐसे में वहां कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों पर बिना साक्ष्य गंभीर आरोप लगाना दुर्भाग्यपूर्ण है।


उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर अमित पांडेय नामक फेसबुक आईडी से साझा की गई एक पोस्ट में सीएम हाउस के प्रभारी आकाश गुप्ता पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, लेकिन इन आरोपों के समर्थन में कोई सार्वजनिक प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है। उनका कहना है कि बिना तथ्य और साक्ष्य के इस प्रकार के आरोपों का प्रचार केवल भ्रम फैलाने और छवि धूमिल करने का प्रयास है।


सागर सिंह ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के पास किसी प्रकार की वास्तविक शिकायत या ठोस साक्ष्य हैं तो उसके लिए शासन-प्रशासन और कानून के तहत शिकायत दर्ज कराने की पूरी व्यवस्था उपलब्ध है। सोशल मीडिया को आरोप-प्रत्यारोप का माध्यम बनाना उचित नहीं है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग निजी स्वार्थ, राजनीतिक द्वेष या सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने के उद्देश्य से भ्रामक सामग्री प्रसारित कर जनमानस को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।

सागर सिंह ने शासन-प्रशासन से मांग की कि बिना प्रमाण किसी व्यक्ति, अधिकारी या संस्था की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों की पहचान कर उनके विरुद्ध विधिसम्मत कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार के दुष्प्रचार पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

अंत में उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया लोकतांत्रिक संवाद का एक महत्वपूर्ण माध्यम है, लेकिन इसका उपयोग तथ्य, जिम्मेदारी और मर्यादा के साथ होना चाहिए। बेबुनियाद आरोपों और दुष्प्रचार पर समय रहते कार्रवाई लोकतांत्रिक व्यवस्था और सार्वजनिक संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए आवश्यक है।

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