lजशपुर:-- मंगलवार को बसो का संचालन पूरी तरह थम गया। बसों को रोकने का फरमान छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ की ओर से जारी हुआ है। आंदोलन करने से पहले बस संचालकों ने राज्य भर में जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर उनकी मांगों की ओर शासन का ध्यानाकर्षण कराया था, पर राज्य सरकार की ओर से कोई अहम फैसला उनके हक में ना आते देखकर छत्तीसगढ़ के नौ हजार बस संचालकों ने एक साथ अपनी बसों को खड़े कर दिया।
वरिष्ठ बस संचालक गुरु शरण भाटिया ने बताया कि राज्य की तरह ही जिले में भी लगभग 200 बसो के पहिए पूरी तरह थमे रहे। उनका कहना है कि बस संचालकों की यह हड़ताल उनकी मांग पूरी ना होते तक अनिश्चित कालिन चल सकती है। बढ़ते ईंधन के दामो ने बस संचालकों को कही का ना छोड़ा। ईंधन के दाम पिछले दो सालो में डेढ़ गुना बढ़ गए, पर बसो का किराया आज भी पिछले वर्षो की भांति ही निर्धारित है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ के अध्यक्ष अनवर अली के निर्देश के बाद पूरे छत्तीसगढ में बस संचालकों ने 13 जुलाई से आगामी समय तक के लिए अनिश्चितकालीन हड़ताल कर दी है। दशमेश बस के संचालक गुरूशरण सिंह भाटिया ने बताया कि नौ हजार बसो का परिचालन बंद हो जाने से लगभग साढे तीन करोड़ रुपए का व्यवसाय प्रभावित हुआ।
सबकी कमाई बंद
बसों का संचालन बंद होने से उस कार्य से आश्रित चालक परिचालक बस एजेंट एवं बोझा ढोने वाले हमाल कुली भी प्रभावित हुए। उनके सामने रोजी रोटी की समस्या खड़ी हो गई। बस संचालक भाटिया ने बताया कि बसों के पहिए थमे रहने से छत्तीसगढ़ में इस व्यवसाय से जुड़े 35 हजार लोगों का काम प्रभावित हो चुका है।
झारखंड रूट की बसें 11 अप्रैल के बाद नहीं चलीं
जशपुर के बस स्टैंड से सबसे अधिक संख्या में बसें झारखंड के लिए रवाना होती हैं। झारखंड जाने वाली 45 बसों के पहिए 11 अप्रैल के बाद से अब तक थमे हुए हैं। झारखंड रूट पर चलने वाली बसों के मालिकों की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। बसें गैरेज या खाली मैदानों में पड़ी जंग खा रही हैं। इधर इन बसों की बुकिंग करने वाले एजेंटों की स्थिति भी खराब है। कई बस एजेंटों ने अपना काम बदल लिया है। कुछ सब्जियां बेच रहे हैं तो कुछ लोगों ने बैंक से लोन लेकर दुकान खाेली है।
यात्री हुए परेशानी, ऑटो व टैक्सी बुक करना पड़ा
बस मालिकों ने 13 जुलाई से हड़ताल की जानकारी पहले ही दी थी, पर यात्रियों को इसकी जानकारी नहीं थी। कई लोग रात्रिकालीन बसों से सुबह जशपुर पहुंचे, जिन्हें लौटने के लिए बसें नहीं मिलीं। वहीं जो लोग कामकाज से जशपुर आए थे उन्हें भीलौटने के लिए साधन नहीं मिले। यात्री ऑटो व टैक्सियां बुक कर गए। वहीं रात्रिकालीन बसों के यात्रियों को लॉज में कमरा बुक कर यहीं रूकना पड़ा।